जब जड़ ही बचाना था तो क्यों काट डाले सालों पुराने दर्जन भर पेड़

जब जड़ ही बचाना था तो क्यों काट डाले सालों पुराने दर्जन भर पेड़


लापरवाही की हद :  मझौली बायपास में पौने दो करोड़ की लागत से बन रहे नाले में नहीं हटाए गए "ठूंठ", दोनों तरफ से डाल दिया स्लैब, बाहर निकल आए सरिया

सिहोरा 

मझौली बाईपास रोड पर करीब पौने दो करोड़ की लागत से निर्माणाधीन नाले के निर्माण में हद दर्जे की लापरवाही देखने को मिल रही है। करीब 200 साल पुराने एक दर्जन से अधिक पेड़ों को नाले के निर्माण के नाम पर कुर्बान कर दिया गया, लेकिन नाले के निर्माण में काटे गए पेड़ों के "ठूंठ" नहीं हटाए गए। "ठूंठ" के बीच से ही संबंधित ठेकेदार ने स्लैब डाल दिया। नाली का निर्माण कैसे हो रहा है इसको देखने की फुर्सत नगरपालिका के उपयंत्री को नहीं है।

जानकारी के मुताबिक मझौली बाईपास में वार्ड क्रमांक 6,7 एवं आठ सहित अन्य वार्डों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए संबंधित नाले का निर्माण कार्य किया जा रहा है। नाले की ड्राइंग और डिजाइन कुछ और है, लेकिन कई जगह नाले के निर्माण के दौरान "ठूंठ" फोटो नहीं हटाया गया लेकिन नाले की दिशा को जगह-जगह परिवर्तित किया जा रहा है। नाले के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी कई बार सवाल उठाए गए, क्योंकि यह शहर की महत्वपूर्ण योजना के तहत इसका निर्माण हो रहा है। 



सड़कों पर नहीं डाला जाता पानी, लोगों का घुट रहा दम

मझौली बाईपास में निर्माणाधीन नाले के निर्माण के दौरान जेसीबी से बड़े-बड़े गड्ढे तो खुद दिए गए,  लेकिन सड़क के दोनों तरफ रहने वाले लोगों उड़ती धूल और डस्ट के कारण सांस लेना मुश्किल हो रहा है। मझौली बाईपास के रहवासियों का आरोप है कि ठेकेदार सड़क के किनारे पड़ी मिट्टी में पानी तक नहीं डलवाता। बुजुर्गों और बच्चों का खड़े होना तक मुश्किल हो रहा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार


नाले का निर्माण टेंडर में दी गई शर्तों के तहत ही किया जाना है। निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। "ठूंठ" को हटाकर ही नाला बनाना है इसको लेकर ठेकेदार को नोटिस जारी किया जाएगा।

लक्ष्मण सिंह सारस, मुख्य नगरपालिका अधिकारी सिहोरा
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