गन्ने के मंडप में शालिग्राम तुलसी का धूमधाम से हुआ विवाह

गन्ने के मंडप में शालिग्राम तुलसी का धूमधाम से हुआ विवाह
दीपो से जगमगाए मठ मंदिर, घर-घर हुया श्रीहरि का पूजन
मांगलिक कार्य अब हो सकेंगे संपन्न




सिहोरा 

हिंदू धर्म में कार्तिक महीने का काफी महत्व होता है कार्तिक के महीने में कई बड़े व्रत व त्यौहार मनाए जाते हैं। बताया जाता है की कार्तिक का महीना भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इस महीने श्रीहरि और लक्ष्मी पूजन का विधान होता है। उसी परपंरा में देवउठनी प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चतुर्मास की योग निद्रा से जागते हैं। प्रबोधिनी एकादशी को शाम के वक्त घर व मंदिर के आंगन में बने तुलसीकोट में गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी विवाह संपन्न किया गया एवं भगवान विष्णु को
गन्ना कंद और सिंघाड़ा चढ़ाकर विधिवत पूजा की गई।


देवउठनी ग्यारस के अवसर पर गोसलपुर के प्रसिद्ध मंदिर खेर माता मंदिर, शिवघाट मंदिर, राधाकृष्ण कुटी मंदिर स्वामी, शिवदत्त धाम राम मंदिर शिवमंदिर शंकर कॉलोनी में भक्तों ने दीप प्रज्वलित किए जिससे नगर के मंदिर दीपों की रोशनी से जगमगा उठे। ग्रामीणों ने मंदिर में गन्ने के मंडप बनाकर भगवान शालिग्राम माता तुलसी का विवाह किया। महिलाओं ने तुलसी का पौधा एक लकड़ी के पटिया पर आंगन में रखकर तुलसी के गमले के ऊपर गन्ने का मंडप सजाया
और तुलसी देवी पर समस्त सुहाग की सामग्री के साथ
लाल चुनरी चढ़ाई तुलसी विवाह का आयोजन कर मंगल गीत गाए। मंत्रोच्चारण कर सुमंगल की मनौती मांगी गई। साथ ही मंदिर में स्थापित सभी देवी देवताओं विष्णु भगवान, शनि भगवान, गणेश भगवान, राम दरबार, शिवलिंग, हनुमान जी, सांईं बाबा का पूजन अर्चन किया गया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु आज के ही दिन क्षीरक्षसागर में जाग गए अब शुभ कार्य विवाह शादी आदि भी शुरू करने का मुहूर्त प्रारंभ हो गया।
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