20 साल पहले मझौली को मिला तहसील का दर्जा, अनुभाग घोषित नही होने से आक्रोश

20 साल पहले मझौली को मिला तहसील का दर्जा, अनुभाग घोषित नही होने से आक्रोश


तहसील अधिवक्ता संघ ने प्रमुख सचिव राजस्व के नाम तहसीलदार मझौली को सौंपा ज्ञापन

मझौली

20 वर्ष पूर्व मझौली को तहसील का दर्जा तो दे दिया गया,  परंतु अनुभाग घोषित न होने से वकीलों एवं आमजन में आक्रोश है। मंगलवार को मझौली अधिवक्ता संघ के द्वारा प्रमुख सचिव राजस्व के नाम तहसीलदार मझौली प्रदीप कुमार मिश्रा को ज्ञापन सौंपा गया। 

ज्ञापन में अधिवक्ता संघ के वकीलों ने बताया कि  15 जनवरी 2002 मझौली को तहसील का दर्जा प्राप्त हुआ था, परंतु 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुभाग घोषित नहीं किया गया जिससे कि आमजन को सरल व सुलभ न्याय प्राप्त नहीं हो रहा है। पूर्व में भी अधिवक्ता संघ के द्वारा संभाग आयुक्त जबलपुर को पत्र दिया गया था। जिसमें संभाग आयुक्त द्वारा आदेश दिया गया था। सप्ताह में एक दिवस अनुविभागीय अधिकारी कोर्ट लगेगी, परंतु अनुविभागीय अधिकारी प्रति सप्ताह नहीं बैठते। जिससे बहुत सारे प्रकरणों में आदेश नहीं हो पाते। सालों साल आदेश पर प्रकरण लंबित रहती हैं, जिससे गरीब एवं आम जनता को न्याय प्राप्त नहीं हो पा रहा है एवं आम जनता को मजबूरन मझौली से 20 किलोमीटर दूर सिहोरा जाना पड़ता है। मझौली तहसील बनने के बाद बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, जबेरा, बरही इत्यादि तहसीलों को तहसील का दर्जा मझौली तहसील के बाद प्राप्त हुआ, परंतु उन तहसीलों में अनुभाग घोषित कर अनुविभागीय अधिकारी की नियुक्ति की जा चुकी है। पर मझौली तहसील को भेदभाव की दृष्टि से देखने के कारण एवं राजनेताओं द्वारा अवरोध उत्पन्न करने के कारण मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी तहसील मझौली जिला जबलपुर जिसमें 90 ग्राम पंचायत सम्मिलित हैं उनकी उपेक्षा कर  अनुभाग घोषित नहीं किया जा रहा है। ज्ञापन सौंपते समय अधिवक्ता अरविंद कोष्टा, एनडी भट्ट, सुनील नामदेव, सुनील तिवारी एवं सभी अधिवक्ता जन उपस्थित रहे।
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