शोपीस बनकर रह गई लाखों की मृदा प्रयोगशाला मजबूरी

शोपीस बनकर रह गई लाखों की मृदा प्रयोगशाला
मजबूरी : किसान मिट्टी की तासीर समझे बिना कर रहे खेती, धूल फांक रहे उपकरण, नहीं मिल रहा किसानों को फायदा


सिहोरा 

विकासखंड सिहोरा के अंतर्गत आने वाले किसानों के लिए मिट्टी परीक्षण के लिए स्थापित की गई मृदा परीक्षण प्रयोगशाला महज शोपीस बनकर रह गई। चार साल पहले बनी प्रयोगशाला में अभी तक विशेषज्ञ की नियुक्ति ही नहीं की गई। इसके निर्माण में किये गये आधा करोड रुपए का खर्च व्यर्थ साबित हो रहा है। मजबूरी में किसानों को मिट्टी की तासीर समझे बिना खेती करनी पड़ रही है या तो फिर मिट्टी की जांच कराने हेतु जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। 
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कई किसानों को मृदा परीक्षण की जानकारी तक नहीं है और इस संबंध में जागरूकता फैलाने हेतु शासन स्तर से प्रयास भी नहीं किए गए न ही कभी किसानों के बीच सरकारी अधिकारियों द्वारा मिट्टी परीक्षण के फायदों के बारे में भी नहीं बताया गया यह बात मैदानी अमले की कथित मिट्टी परीक्षण की बातों को भी कटघरे में खड़ा कर रही है

जिला मुख्यालय से होती है जांच


हासिल जानकारी के अनुसार विकासखंड सिहोरा के अंतर्गत 60 ग्राम पंचायतों के 160 गांव आते हैं, वहीं कृषि जोत का रकबा 79 हजार हेक्टेयर है। ब्लॉक स्तर पर कृषि रकवा इतना बड़ा होने के बाद भी मिट्टी परीक्षण की व्यवस्था न होने से किसान परेशान हैं, वहीं कृषि अधिकारियों का कहना है की जो किसान मिट्टी का सैंपल लेकर पहुंचते हैं उनकी जांच जिला मुख्यालय से विशेषज्ञों द्वारा कराई जाती है। गौर करने वाली बात यह है की अगर ऐसे ही मिट्टी की जांच जिला मुख्यालय से करानी थी तो फिर लाखों रुपए खर्च करके आखिर प्रयोगशाला क्यों बनाई गई।


धूल फांक रही मशीनें

स्मरण रहे की मृदा परीक्षण के लिए प्रयोगशाला का निर्माण बीस लाख रुपए की लागत से वर्ष 2018 में किया गया था, वही लैब में तीस लाख रूपए की मशीनें भी रखी गई थीं, लेकिन विशेषज्ञ नहीं होने के चलते प्रयोगशाला शोपीस बनकर रह गई है। इस प्रयोगशाला में रखी कीमती मशीने धूल फांक
रही हैं।

जरुरी है मिट्टी परीक्षण

जहां एक ओर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खेत मे लगी फसल की उपज बढ़ाने के लिए मिट्टी परीक्षण को जरूरी माना गया है इसी लिहाज से प्रदेश सरकार ने लगभग हर विकासखंड में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की थी, लेकिन मैदानी अमले व जन प्रतिनिधियो की निष्क्रियता से इसका फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

ये हैं आंकडे

1. सिहोरा विकासखंड में वर्ष 2019-20 में केवल 114 नमूने ही मृदा जांच के लिए भेजे गए 

2. 25 हजार से अधिक किसानों वाले क्षेत्र में यह संख्या बेहद कम है, हालांकि पूर्व के वर्षों में नमूनों की संख्या अधिक थी
3. कृषि अधिकारियों का कहना है की गांव गांव जाकर किसानों को मिट्टी परीक्षण की सलाह दी जाती है
4. वर्ष 2016-17 में 7001, 2017-18 में 3851,
2018 19 में 850 नमूने जांच के लिए भेजे गए 

5.आंकड़ों से स्पष्ट है की साल दर साल नमूनों की संख्या घटती जा रही है 


मिलती है सहायता राशि

मृदा परीक्षण योजना के तहत जिन किसानों के खेतों की मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है उसकी भरपाई के लिए किसानों को सलाह दी जाती है की स्वयं मार्केट से खाद बीज खाद खरीद कर खेतों में डालें जिससे पोषक तत्वों की कमी की भरपाई हो सके इसके बदले किसानों को एक हेक्टेयर पर 2500 सौ रूपये सब्सिडी कृषि विभाग द्वारा दी जाती है।

इनका कहना

सिहोरा में बनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला एसडीओ के अधीन है। उक्त प्रयोगशाला में विशेषज्ञ की नियुक्ति शीघ्र की जावेगी। इस संबंध में शासन स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। किसानो की मिट्टी का परीक्षण जिला मुख्यालय में कराया जाता है।

के.एस.नेताम, सहायक संयुक्त संचालक
किसान कल्याण तथा कृषि विभाग जबलपुर संभाग

Previous Post Next Post
Wee News