कृषि भूमि पर बेवा को दिलाया हक अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सिहोरा का फैसला

कृषि भूमि पर बेवा को दिलाया हक


अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सिहोरा का फैसला

पति की मृत्यु के बाद सिकमीदार ने मिली भगत से अपने नाम दर्ज करा ली थी 1.21 हेक्टेयर भूमि


सिहोरा

पति की मृत्यु होने पर शासन द्वारा पट्टे पर दी गई कृषि भूमि बेवा का नाम दर्ज होने की बजाय मिली भगत से सिकमी पर खेती कर रहे व्यक्ति के नाम कर दी गई। मामला प्रकाश में आने पर अनुविभागीय अधिकारी सिहोरा आशीष पांडेय ने भूमि न केवल वापस वास्तविक हकदार के नाम दर्ज करने का फैसला दिया बल्कि खसरा के कालम नंबर 12 में अहस्तांतरणीय की प्रविष्टि दर्ज करने का आदेश भी पारित किया। 
अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सिहोरा आशीष पांडेय ने प्रकरण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उनके न्यायालय में रेखाबाई भूमिया पति कल्लू निवासी रौंसरा तहसील मझौली ने आवेदन देकर शिकायत की कि ससुर को शासन द्वारा मौजा रोंसरा की खसरा नंबर 7 की 1.21 हेक्टेयर कृषि भूमि पट्टे पर दी गई थी। ससुर की मृत्यु के बाद यह कृषि भूमि पति के नाम से दर्ज हो गई। ससुर की जीवित रहने के समय से ही यह भूमि नयागांव निवासी संदीप पटैल को सिकमी पर दी जा रही थी। बाद में पति की भी मृत्यु होने पर संदीप पटैल भूमि को सिकमी पर लेकर खेती करता आ रहा था। लेकिन इस बीच उसने फौती उठवाने के बहाने दस्तावेज लेकर मिली भगत से भूमि अपने नाम पर दर्ज करा ली। आवेदक रेखा बाई ने शिकायत में उल्लेखित किया कि वह अनुसूचित जनजाति वर्ग की है और ऐसी स्थिति में संदीप पटैल को भूमि का अंतरण अवैध है। 
श्री पांडेय ने बताया कि रेखा बाई से प्राप्त इस आवेदन पर प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेजों का परीक्षण किया गया तथा सभी पक्षकारों की समक्ष में सुनवाई की गई। इस दौरान यह स्पष्ट हुआ कि नायब तहसीलदार पौंडा तहसील मझौली द्वारा बिना पटवारी से जांच प्रतिवेदन प्राप्त कर संदीप पटैल के नाम पर अपंजीकृत वसीयत के आधार पर वर्ष 2018-19 में दर्ज कर दी गई। उन्होंने बताया कि वादग्रस्त भूमि अनुसूचित जनजाति के सदस्य कल्लू पिता मंहगू के नाम भूमि स्वामि के हक में दर्ज थी तथा खातेदार के पिता को यह कृषि भूमि शासन द्वारा पट्टे पर प्रदान की गई थी। श्री पांडेय ने अपने फैसले में मृतक खातेदार की पत्नी के जीवित होने के बावजूद गैर अनुसूचित जनजाति संदीप पटैल के नाम दर्ज करने के नायब तहसीलदार पौड़ा तहसील मझौली के आदेश को अवैध मानते हुए उसे निरस्त कर दिया तथा भूमि को रेखाबाई के नाम दर्ज करने तथा खसरा के कालम नंबर 12 में अहस्तांतरणीय की प्रविष्टि करने का आदेश पारित किया।
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