सेटेलाइट से हुए सर्वे के बाद मकड़जाल में फंस गया किसान

सेटेलाइट से हुए सर्वे के बाद मकड़जाल में फंस गया किसान
असत्यापित दिखने लगे खसरे, जिम्मेदार सुनने को तैयार नहीं, दफ्तरों में लग रही भीड


सिहोरा 

मध्य प्रदेश शासन के द्वारा धान पंजीयन प्रक्रिया के बाद पटवारियों द्वारा खेत खेत जाकर धान उपार्जन हेतु हुए खेतों में लगी फसलों का सत्यापन तो किया गया। सत्यापन के बाद गडबडी की आंशका को देखते हुये अधिकारियों  द्वारा सेटेलाइट के माध्यम से खेतों में लगी धान की फसल का सर्वे किया गया जिसमें बड़ी संख्या में पटवारियों द्वारा और सेटेलाइट के माध्यम से किए गए सर्वे में अंतर पाया गया।

जिसे सरकारी अधिकारियों ने गंभीरता से लेते हुए पुनः पटवारियों को खसरे व खेत की जांच के लिए फील्ड में खदेड़ा अब स्थिति यह है की किसानों के खसरे असत्यापित दिखने लगे। जिस कारण किसानों के न सिलाड बुक हो रहे हैं और जैसे तैसे अगर जिस किसान का स्लॉट बुक हुआ है तो असत्यापित खसरे के चलते कंप्यूटर में फीडिंग नहीं हो रही है। वहीं जिन किसानों की कंप्यूटर में फीडिंग हो गई है। उनके भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
शासन की इस प्रक्रिया से किसानों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है वहीं दूसरी ओर किसान इस बुरे भंवर जाल में फंस गया है। किसान बेबस लाचार होकर दफ्तरों व अधिकारियों के चक्कर लगा लगा कर थक हार कर अपनी किस्मत को कोसते हुए घर में दुबक कर बैठ गया है। स्मरण रहे की जहां एक ओर अपने आप को किसान का बेटा कहने वाले प्रदेश के किसान हितेषी मुख्यमंत्री मंच के माध्यम से बड़ी-बड़ी घोषणाएं व योजनाएं बताकर खेती को लाभ का धंधा बनाने की बातें करते हैं, वही वस्तु स्थिति बिल्कुल विपरीत है कृषक हल्केराम पटेल शिव कुमार कोरी श्यामलाल लोधी का कहना है की किसान को कदम कदम पर संघर्ष करना पड़ता है। किसान को नहर का पानी, सिंचाई हेतु बिजली, खाद, बीज, उर्वरक उपार्जन व्यवस्था व भुगतान के लिए युद्ध स्तर की लड़ाई लड़नी पड़ती है। तब कहीं जाकर किसान को आवश्यक सुविधाओं व हक प्राप्त हो पाता हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार की परिकल्पना कैसे साकार होगी
यह एक सोचनीय प्रश्न है।

इनका कहना

खसरों का सत्यापन कर सूची वरिष्ठ मुख्यालय भेज दी गई थी। पुनः सत्यापन हेतु सूची प्राप्त हुई है। शीघ्र ही सत्यापन का कार्य किया जा रहा है।
राकेश चौरसिया, तहसीलदार सिहोरा
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