श्रीमद्भागवत महापुराण साक्षात भगवान का स्वरूप : पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी

श्रीमद्भागवत महापुराण साक्षात भगवान का स्वरूप : पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी


श्री शिव मंदिर बाबाताल में सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा श्री कृष्ण कथामृत महोत्सव

सिहोरा

श्रीमद भागवत महापुराण साक्षात भगवान का ही एक स्वरूप है। कृष्ण भगवान अपने माता-पिता के चरणों में सिर रखकर प्रणाम करते हैं, अत: हम सब को भी अपने माता-पिता सास-ससुर बड़े जनों का सम्मान आदर करना चाहिए। उक्त उद्गार
श्री शिव मंदिर बाबाताल में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा श्री कृष्ण कथामृत महोत्सव में व्यासपीठ से प्रथम दिवस पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने व्यक्त किए।


श्रीमद् भागवत कथा श्री कृष्ण कथा अमृत महोत्सव में पाटन विधायक अजय विश्नोई, पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिनेश चौरसिया, अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने कार्यक्रम स्थल में पहुंचकर व्यासपीठ और कथावाचक पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी का पूजन किया।

व्यासपीठ से पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने भागवत महात्म्य और श्री सुकदेव जी के आगमन के प्रसंग का वर्णन किया। श्रीमद्भागवत महापुराण सभी वेदों का व्याख्यात पुराण है, जिसमें पूरी सृष्टि का स्वरूप समाया हुआ है। जिसमें जन्म-मृत्यु का संर्पूण ज्ञान छिपा हुआ है। सांसारिक जीवन जीने का महत्व बहुत ही सरल ढंग से श्रीमद्भागवत  में बताया गया है। जीवन में एक बार श्रीमद्भागवत की कथा का श्रवण करने के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
Previous Post Next Post
Wee News