सरकार के दावों की पोल खुलता हुआ स्कूल

 सरकार के दावों की पोल खुलता हुआ स्कूल छात्र-छात्राओं के लिए न पीने के पानी की व्यवस्था न टॉयलेट की 






 अव्यवस्थाओं की पोल खोलती शासकीय प्राथमिक शाला पहरेवानाका शाला

सिहोरा 

एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों में टॉयलेट, पीने के पानी की व्यवस्था, बाउंड्री वाल सहित अन्य व्यवस्थाओं पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका सिहोरा के वार्ड नंबर 9 में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला पहरेवानाका में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पीने के पानी के लाले पड़े। इतना ही नहीं टॉयलेट तो बने जरूर है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने से उन में ताले लटके हैं। मध्यान भोजन बनाने वाले समूह को पीने के पानी की समस्या के चलते घर से भोजन बनाकर लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वही जिम्मेदार विभाग के अधिकारी जानकारी देने के बावजूद अंजान बने हैं।


नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 9 स्थित शासकीय प्राथमिक शाला पहरेवानाका में पहली से पांचवीं तक 90 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां पढ़ने आने वाली छात्र-छात्राएं अधिकतर आदिवासी बस्ती से हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि स्कूल परिसर में हैंडपंप के नीचे का हिस्सा तो लगा है लेकिन हैंडपंप है ही नहीं।  न ही इस हैंडपंप से पानी आता है। मजबूरी में यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पीने का पानी या तो घर से लाना पड़ता है या यहां वहां से ढोकर। 


शौचालय में लटके ताले, बाउंड्री वाल ही नहीं

स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा और छात्रों के लिए शौचालय तो बना है, लेकिन पानी नहीं होने से इसका उपयोग ही नहीं हो पा रहा है जिसके कारण शौचालय में ताला लटका है। पहरेवा स्कूल का निर्माण वर्ष 2017-18 में हुआ था, लेकिन आज तक स्कूल परिसर में बाउंड्री वाल ही नहीं बनी। छात्र-छात्राओं को दिए जाने वाले मध्यान भोजन के लिए किचन सेट तो बना है लेकिन पानी की अनुपलब्धता के चलते स्व सहायता समूह को घर से भोजन बनाकर लाना पड़ता है। 

सिर्फ ऑफिस में बैठकर विभाग के अधिकारी कर रहे खानापूर्ति

शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं, जबकि मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग एवं जिला कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया है कि हर शासकीय शाला में पीने का पानी, शौचालय, बिजली सहित अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं किसी भी समय भोपाल से आने वाली टीम स्कूलों का औचक निरीक्षण कर सकती है लेकिन इसके बावजूद अधिकारी सिर्फ अपने आफिस में बैठकर खानापूर्ति करने में लगे हैं।


इनका कहना

नेशनल हाईवे के निर्माण के दौरान सीमांकन में स्कूल की कुछ जमीन चली गई थी जिसके कारण अभी बाउंड्री वाल नहीं बन पाई। जहां तक पीने के पानी और शौचालय की बात है तो इसकी जानकारी मंगाई जाएगी और प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द यहां दोनों व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं। 

अशोक उपाध्याय,  विकास खंड शिक्षा अधिकारी सिहोरा
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