जिसके पास प्रेमधन है वह निर्धन नही हो सकता...श्रीमद्भागवत कथा मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी

जिसके पास प्रेमधन है वह निर्धन
नही हो सकता...श्रीमद्भागवत कथा
मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी


सिहोरा 

 गोसलपुर के निकटवर्ती ग्राम हिरदेनगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह यज्ञ का आयोजन किया गया है । इस अवसर पर  कथावाचक युगेन युगेंद्राचार्य जी महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा की आदर्श मित्रता की कथा सुनाते हुए कहा की सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं
पर परमात्मा ने कहा की मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।


कथावाचक ने आगे कहा की कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। यही कारण है की आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा, सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए की आखिर सुदामा में क्या खासियत है की भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। कृष्ण-सुदामा
चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे
श्रीमद भागवत कथा आरती में यजजमान एवं ग्राम के जगदीश असाटी रघुनंदन पांडेय महेश असाटी राजेश श्रीपाल उमेश गिरी शिवदत्त पांडे शिवदत्त पांडेय सुखचैन काछी अनिल काछी रविशंकर असाटी भगवानदास गडारी रामसहाय गडारी मुन्ना गडारी धनीराम गडारी सहित आयोजन समिति के लोग उपस्थित रहे।
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