भक्त और परमात्मा के बीच विश्वास की डोर है भक्तों के विश्वास की रक्षा करने स्वयं परमात्मा करते हैं : पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी

भक्त और परमात्मा के बीच विश्वास की डोर है भक्तों के विश्वास की रक्षा करने स्वयं परमात्मा करते हैं : पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी


श्री शिव मंदिर बाबा ताल में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा श्री कृष्ण कथामृत महोत्सव

सिहोरा 

भक्त और परमात्मा के बीच विश्वास की डोर है और भक्तों के विश्वास की रक्षा परमात्मा स्वयं करते हैं। परमात्मा जब वह भक्तों का अनुरागयुक्त समर्पण देखते हैं तो स्वयं दौड़े चले आते हैं। उक्त प्रवचनों की अमृत वर्षा पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने सोमवार को श्री शिव मंदिर बाबा ताल में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा श्री कृष्ण कथामृत महोत्सव में कही।

पंडित इंद्रमणि ने आगे  कहा कि जब ध्रुव ने बाल्यावस्था में जंगल में जाकर ईश्वर का ध्यान लगाया तो भगवान ने आकर उन्हें दर्शन दिये। आगे कहा कि जब भगवान भक्त के वश में होते हैं तो बहुत सारी लीलाओं का दर्शन कराते हैं। उन्होंने कहा कि भक्त जब-जब ईश्वर को अनुराग व समर्पण के साथ पुकारता है तो भगवान क्षण मात्र भी देर नहीं करते बल्कि नंगे पर ही दौड़े चले आते हैं। कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कथाव्यास ने कहा कि भगवान के चरित्र के श्रवण से व्यक्ति का लोक और परलोक दोनों सवर जाते हैं। श्रीमद्भागवत की महिमा को बताते हुए उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत के श्रवण मात्र से जीव के सभी पापों का नाश हो जाता है और उसकी संसार में बार-बार के आवागमन कुचक्र से मुक्ति हो जाती है।
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