हिरण नदी के तट पर श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी ऐतिहासिक सतधारा मेला

हिरण नदी के तट पर श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी


ऐतिहासिक सतधारा मेला : मकर संक्रांति 14 जनवरी से 26 जनवरी तक होगा आयोजित, मेला आयोजन को लेकर तैयारियां हुई पूरी


सिहोरा

हिरण नदी के तट पर मकर संक्रांति की शुरुआत के साथ ही 12 दिवसीय (14 जनवरी से 26 जनवरी तक) सिहोरा अंचल के ऐतिहासिक सतधारा मेले की शुरुआत होगी। मेले के आयोजन को लेकर आयोजक जनपद पंचायत द्वारा सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। करीब 2 साल बाद आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मालूम रहे कि करीब 2 साल तक कोविड-19 के चलते ऐतिहासिक सतधारा मेले का आयोजन नहीं हुआ था। इस बार मेले को लेकर दुकानदारों व्यापारियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।


करीब 30 एकड़ में आयोजित होता है मेला

यह मेला करीब 30 एकड़ के क्षेत्र में लगता है। जिसमें मनिहारी सामान, लकड़ी, पत्थर, खाने-पीने की वस्तुएं की दुकानें लगाई जाती हैं। एक समय मेले में लकड़ी और लोहे से बनी कलात्मक वस्तुओं के लिए इसकी ख्याति पूरे देश में थी। खासकर लकड़ी की सामग्री पलंग, कुर्सियां, टेबिल, झूले आदि खरीदने के लिए पूरे देश से थोक व्यापारी भी यहां आते थे।

ब्रिटिश काल में भी रहा जलवा

जानकारों का कहना है कि सतधारा मेले का इतिहास तीन सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। कुछ समय तक पंचायत मेले का आयोजन कराती रही। 1932 में ब्रिटिश शासन लोकल बोर्ड द्वारा इसका आयोजन कराया जाने लगा। बाद में जनपद पंचायत प्रशासन के इसकी मुख्य आयोजक संस्था बन गई। जो हर वर्ष मेले का आयोजन कराती है।


ऐसे पड़ा सतधारा नाम

सदियों पूर्व यहां हिरन नदी के किनारे सप्त ऋषि तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान हिरन नदी का जल स्तर बढ़ गया। नदी का पानी पूरे वेग से सप्त ऋषियों के पास तक आया और नदी ने एक कन्या का रूप रखकर ऋषि वर से आगे जाने के लिए रास्ता मांगा। जब बार बार आग्रह के बाद ध्यान में मग्न ऋषि की तपस्या नहीं टूटी तो हिरन ने अपने वेग को बढ़ाया। इस वेग से अचानक यहां सात धाराएं फूट पड़ीं। इन्ही सात धाराओं के माध्यम से ऋषियों को बचाते हुए हिरन नदी आगे की तरफ बढ़ गई। इन्हीं सात धाराओं की वजह से इसका नाम सतधारा प्रचलित हो गया।

इनका कहना

करीब दो साल बाद हिरण नदी के तट पर सतधारा मेले का आयोजन हो रहा है। हिरण नदी के तट पर स्थित मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ सारी व्यवस्थाएं शासन और प्रशासन स्तर पर पूरी कर ली गई हैं अनुमान है कि दो साल बाद आयोजित होने वाले इस मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। 

रश्मि मनेंद्र अग्निहोत्री, अध्यक्ष जनपद पंचायत सिहोरा
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