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नगरी में गूंजी पारंपरिक स्वाद की महक: 300 प्राध्यापकों ने चखा पान-रोटी का स्वाद, शिक्षिका रंजीता और तुमनचंद साहू के नवाचार ने जीता दिल

17 Feb 2026 | JAY SHANKAR PANDEY | 12 views
नगरी में गूंजी पारंपरिक स्वाद की महक: 300 प्राध्यापकों ने चखा पान-रोटी का स्वाद, शिक्षिका रंजीता और तुमनचंद साहू के नवाचार ने जीता दिल

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, नगरी में आज शिक्षा महाविद्यालय रायपुर के अध्यापकगण शैक्षणिक भ्रमण हेतु पधारे। इस अवसर पर संस्थान परिवार द्वारा उनका आत्मीय एवं गरिमामय स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक गतिविधियों, नवाचारों एवं प्रशिक्षण पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। पूरे शैक्षणिक भ्रमण के दौरान पारंपरिक व्यंजन पान-रोटी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लगभग 300 से अधिक प्राध्यापकों, प्रशिक्षणार्थियों एवं उपस्थितजनों ने पान-रोटी का स्वाद लिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्राध्यापकों द्वारा पान-रोटी की विशेष चर्चा की गई और इसकी सराहना की गई।

पान-रोटी की व्यवस्था साहू दंपत्ति तुमनचंद साहू एवं रंजिता साहू के सौजन्य से की गई। शिक्षिका रंजिता साहू द्वारा दाइट नगरी के प्रशिक्षणार्थी अध्यापक-अध्यापकों को पान-रोटी बनाने की व्यवहारिक विधि सिखाई गई। प्रशिक्षण के दौरान तैयार पान-रोटियाँ ही आगंतुक महाविद्यालय के प्राध्यापकों को परोसी गईं। इस प्रकार एक ही पहल से प्रशिक्षण, जागरूकता और आतिथ्य—तीनों उद्देश्य सफल हुए।

इसी क्रम में तुमनचंद साहू द्वारा पान-रोटी के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि पान-रोटी न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, क्योंकि इसमें स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है। साथ ही पान-रोटी हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का सशक्त माध्यम है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का प्रभावी साधन भी बन सकती है।

साथ ही साहू दंपत्ति द्वारा जैविक खेती की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें “गुल्लक” अवधारणा के अंतर्गत गुल्लक मॉडल, नदियों की वर्णमाला, गणित वर्णमाला चार्ट एवं अन्य नवाचारी शैक्षिक सामग्री का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षणार्थी अध्यापक-अध्यापकों को शिक्षण-सहायक चार्टों का वितरण भी किया गया।

कार्यक्रम उत्साह, नवाचार, सांस्कृतिक चेतना एवं शैक्षणिक समन्वय के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अंत में आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा की।


JAY SHANKAR PANDEY
JAY SHANKAR PANDEY

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