बिलासपुर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। जिस स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को बेहतर और निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया था, अब उसी योजना में फीस वसूली के फैसले पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस और छात्र संगठन इसे शिक्षा पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे नियमों के तहत लिया गया निर्णय बता रही है।
वर्ष 2019-20 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की शुरुआत की थी। इन स्कूलों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। योजना को प्रदेशभर में व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश इन विद्यालयों में कराया।लेकिन अब शिक्षा सत्र 2026-27 से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर के विद्यार्थियों से विभिन्न मदों में शुल्क लेने का आदेश जारी होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। आदेश के अनुसार हाईस्कूल विद्यार्थियों की वार्षिक फीस 410 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई है, जबकि हायर सेकेंडरी विद्यार्थियों की फीस 445 रुपये से बढ़ाकर 550 रुपये कर दी गई है। शुल्क में गतिविधि निधि, विज्ञान क्लब, रेडक्रॉस, क्रीड़ा, प्रयोगशाला और परीक्षा शुल्क जैसे मद शामिल हैं।बिलासपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। छात्र संगठन NSUI ने सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन विद्यालयों की स्थापना गरीब विद्यार्थियों को निःशुल्क और बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी, वहां फीस वसूली करना योजना की मूल भावना के विपरीत है। संगठन का आरोप है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
फिलहाल फीस वृद्धि और शुल्क वसूली के मुद्दे ने शिक्षा के साथ-साथ राजनीति को भी गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस फैसले पर कायम रहती है या विरोध के बीच कोई नया निर्णय सामने आता है।