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एचपीवी वैक्सीन किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में अहम : डॉ. आशीष सिन्हा; तिल्दा-नेवरा अस्पताल में निःशुल्क टीकाकरण जारी

25 Apr 2026 | WEENEWS DESK | 27 views
एचपीवी वैक्सीन किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने में अहम : डॉ. आशीष सिन्हा; तिल्दा-नेवरा अस्पताल में निःशुल्क टीकाकरण जारी

तिल्दा नेवरा। खंड चिकित्सा अधिकारी तिल्दा नेवरा डाक्टर आशीष सिन्हा ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन अवश्य लगवाएं। यह वैक्सीन सरकार निशुल्क उपलब्ध करा रही है। खंड चिकित्सा अधिकारी तिल्दा नेवरा डाक्टर आशीष सिन्हा ने कहा है की जैसे कि अभी यह भ्रांति फैली हुई है कि यह वैक्सीन लगने से लड़कियां आगे जाकर गर्भवती नहीं हो पाएंगे शादी के बाद तो यह धारणा बिल्कुल गलत है और हमारे यहां वैक्सीन डेली लगेगा 10 से 2 के बीच तो ज्यादा से ज्यादा अभिभावक अपनी किशोरी बालिका जो 14 साल पूरा कर चुकी हैं और जिनका 15 साल अभी नहीं हुआ है वह आए और यह वैक्सीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तिल्दा एवं खरोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंगोली एवं खैरखुट मैं जाकर सुबह 10 से 2:00 के बीच लगवाएं।

उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। स्कूल स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किशोरियों और उनके अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व के बारे में सही जानकारी दी जाए।
खंड चिकित्सा अधिकारी तिल्दा नेवरा डाक्टर आशीष सिन्हा ने बताया कि यह टीकाकरण अभियान मुख्य रूप से 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों के लिए चलाया जा रहा है। यह वैक्सीन एचपीवी के टाइप-16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करती है जो सर्वाकल कैंसर के प्रमुख कारण माने जाते हैं।

साथ ही टाइप-6 और 11 से भी बचाव करती है। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से में विकसित होने वाला कैंसर है, जिसका मुख्य कारण एचपीवी संक्रमण है। धूम्रपान, कम उम्र में विवाह व गर्भधारण, बार-बार प्रसव और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।

खंड चिकित्सा अधिकारी तिल्दा नेवरा डाक्टर आशीष सिन्हा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीकाकरण से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि लाभार्थी किशोरी खाली पेट न हो। साथ ही टीकाकरण से पूर्व अभिभावकों की ओटीपी आधारित या लिखित सहमति लेना अनिवार्य किया जाए।अभिभावकों और छात्राओं को जागरूक किया जाए ताकि अधिक से अधिक किशोरियों इस अभियान का लाभ उठा सकें।

 

WEENEWS DESK
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