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 Lord Shri Rajivlochan : गजब का चमत्कार; यहाँ भगवान श्री राजीवलोचन साक्षात बदलते हैं स्वरूप: सुबह बालक, दोपहर में युवा और शाम को दिखते हैं प्रौढ़ावस्था में

06 Feb 2026 | WEENEWS DESK | 41 views
 Lord Shri Rajivlochan : गजब का चमत्कार; यहाँ भगवान श्री राजीवलोचन साक्षात बदलते हैं स्वरूप: सुबह बालक, दोपहर में युवा और शाम को दिखते हैं प्रौढ़ावस्था में

राजिम। Lord Shri Rajivlochan : पवित्र तीन नदियों के संगम तट पर स्थित राजिम को हरि और हर की नगरी कहा जाता हैं। इनके अनन्य नाम सुनने को मिलते हैं जैसे कमलक्षेत्र, पद्मावतीपुरी, देवपुरी, छोटा काशी, राजीव नगर, राजिम इत्यादि। प्रचलित कथा के अनुसार बताया जाता है कि सत्ययुग में राजा रत्नाकर हुए। उन्होंने सौ यज्ञ किया जैसे ही यज्ञ करते राक्षस गण आकर उसमें व्यवधान डाल देते थे। साधु संतो को प्रताड़ित करते थे और यज्ञ सम्पन्न होने में विघन डालते। राजन बहुत दुखी हो गये और भगवान विष्णु को याद करने लगे।

उसी समय विष्णु जी बैकुंठ लोक छोड़कर त्रिकूट पर्वत में गज और ग्राहा की लड़ाई को शांत कराने के लिए उपस्थित हुए थे। कहा जाता हैं कि गजराज पानी पीने के लिए सरोवर में उतरे तो ग्राहा (मगरमच्छ) ने गज (हाथी) के पैर को कसकर जकड़ लिया। पीड़ा से व्याकुल गजराज उसी सरोवर से कमल फूल तोड़कर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए रोने लगे और रक्षा की याचना की। आवाज सुनकर विष्णु जी तुरंत उपस्थित हुए और ग्राहा को खण्ड-खण्ड कर मुक्ति दिलाई तथा गज पीड़ा से मुक्त हो गये। उसी समय राजा रत्नाकर की आवाज भगवान विष्णु के कान में पड़ी और भगवान ने उनके समक्ष प्रकट होकर आसुरी शक्तियों का समूल नाश किया था।

राजा रत्नाकर के भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने दो वरदान मांगने को कहा तब उन्होंने कहा कि आप राजीव लोचन के रूप में इस नगर में हमेशा के लिए विराजमान हो जाइए। दूसरा वरदान मेरे बाद आने वाले पीढ़ी आपकी पूजा अर्चना करे। भगवान ने दोनो वरदान पर सहमति जताई, तब से भगवान विष्णु राजीवलोचन के रूप में यही विराजमान हो गए। मंदिर में उनका स्वरूप दिनभर में तीन बार बदलता हैं जिसका अनुभव खुद दर्शनार्थी अपनी वाणी से बयां करते हैं। सुबह बाल्यावस्था, दोपहर युवावस्था और शाम को प्रौढ़ावस्था प्राप्त दाल, चावल एवं सब्जी का लगता हैं भोग

भगवान राजीवलोचन को सुबह, दोपहर, रात्रिकाल में दाल, चावल एवं सब्जी का भोग लगाया जाता हैं। पर्व पर विशेष रूप से सर्व स्नान करते हैं, नैवेद्य, ऋतुफल इत्यादि को भी ग्रहण करते हैं। भगवान के भोग लगने के उपरांत दाल, चावल को प्राप्त करने के लिये श्रद्धालु टूट पड़ते हैं। इसके अलावा पीड़िया प्रसाद का भी वितरण किया जाता है। भगवान राजीवलोचन का पीड़िया प्रसाद पूरी दुनिया में प्रसिध्द हैं इसे चावल से बनाया जाता है जिसमें शुद्ध घी का उपयोग होता है जो महीनों तक खराब नहीं होतमंदिर परिसर में विष्णु की अनेक प्रतिमाएं

यहां का मंदिर दो परिसरों में विभक्त हैं पहले परिसर के मध्य में भगवान राजीवलोचन के विशाल मंदिर में खुद भगवान विष्णु राजीवलोचन के रूप में विराजमान हैं। प्रतिमा के दाये बाये देवी लक्ष्मी और माया जी उपस्थित हैं। गर्भगृह के दीवाल से लगे स्तंभ में देव विग्रह स्थापित हैं इनके चारो कोण में वराह अवतार मंदिर, नरसिंह अवतार मंदिर, वामन अवतार मंदिर तथा बद्री नारायण मंदिर के साथ हीं मंदिर के निर्गमन द्वारा पर साक्षी गोपाल विराजित हैं। परिसर में महाप्रभु जगन्नाथ का मंदिर भी स्थापित है। द्वितीय परिसर में सूर्यदेव नारायण, गणेश जी, श्यामकार्तिकेय, दानदानेश्वर महादेव मंदिर, राजराजेश्वर महादेव मंदिर, राजिम भक्तिन माता मंदिर इत्यादि स्थापित है। इसके अलावा राजिम में लक्ष्मीनारायण मंदिर, छोटे राजीवलोचन मंदिर, रामचंद्र देवल तथा दत्त भक्तों के श्रध्दा का केंद्र दत्तात्रेय मंदिर हैं।

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