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खितौला से सिहोरा तक गूंजा हर-हर महादेव, हजारों भक्तों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा

18 Aug 2026 | प्रशांत बाजपेई | 784 views
खितौला से सिहोरा तक गूंजा हर-हर महादेव, हजारों भक्तों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा

खितौला से सिहोरा तक गूंजा हर-हर महादेव, हजारों भक्तों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा


सिहोरा


सावन के पावन माह में सोमवार को खितौला से सिहोरा तक निकली भव्य कांवड़ यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हिरन नदी घाट से जल लेकर हजारों की संख्या में कांवड़िए नंगे पैर करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए सिहोरा के प्रसिद्ध बाबाताल मंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर इस यात्रा ने पिछले 15 वर्षों के सारे रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए।


सुबह से ही हिरन नदी घाट खितौला पर कांवड़ियों का पहुंचना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा घाट और आसपास का क्षेत्र भगवा रंग में रंग गया। कांवड़ियों ने हिरन नदी से पवित्र जल अपनी कांवड़ में भरा और भगवान शिव के जयकारों के साथ यात्रा प्रारंभ की। नंगे पैर पांच किलोमीटर की यात्रा में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने कांवड़ियों का स्वागत किया।


यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान भोलेनाथ की भव्य झांकी रही। रथ पर सजे भगवान शिव के मनमोहक स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। झांकी के साथ सिद्धन धाम के आचार्य भी यात्रा में शामिल रहे। डीजे, भजनों और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मार्ग शिवमय नजर आया।


इस बार कांवड़ यात्रा में युवाओं और महिलाओं की विशेष रूप से बड़ी भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में युवा पूरे उत्साह के साथ कांवड़ लेकर चले, वहीं महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर यात्रा में हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए आयोजकों का कहना है कि यह पिछले 15 वर्षों में सिहोरा की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा रही।


आस्था, अनुशासन और शिवभक्ति का संगम


कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, संकल्प और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़िए पवित्र नदी से जल लेकर उसे भगवान शिव को अर्पित करने के लिए कठिन पैदल यात्रा करते हैं। मान्यता है कि सावन में श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष देशभर में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल होते हैं।


खितौला से सिहोरा की यह यात्रा भी इसी धार्मिक परंपरा और लोक आस्था को आगे बढ़ा रही है। नंगे पैर यात्रा करना, रास्तेभर शिव का नाम जपना और अंत में पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक करना श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और आत्मिक संतोष का विषय रहा।


सिहोरा पहुंचने पर कांवड़ यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। इसके बाद कांवड़ियों ने बाबाताल मंदिर पहुंचकर हिरन नदी से लाए पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा।


इस भव्य आयोजन ने न केवल सिहोरा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आस्था की शक्ति किस तरह समाज के हर वर्ग—युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग—को एक सूत्र में बांध सकती है।

प्रशांत बाजपेई
प्रशांत बाजपेई

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