बिलासपुर। CG NEWS: बिलासपुर सिविल लाइन थाना क्षेत्र के स्वर्ण जयंती नगर में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे में दो राजमिस्त्रियों की जान चली गई। निर्माणाधीन मकान में काम के सिलसिले में पहुंचे रवि बंजारे और भूपेंद्र साहू की मकान के बेहद करीब से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। दोनों डीएलएस कॉलेज के पास स्थित अटल आवास के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ठेकेदार से बातचीत के बाद मकान की ऊपरी मंजिल पर पहुंचे थे, जहां हाईटेंशन लाइन से संपर्क होने के बाद हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि पहले एक राजमिस्त्री करंट की चपेट में आया और उसे बचाने की कोशिश में दूसरा साथी भी इसकी चपेट में आ गया। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। वहीं अब इस घटना ने निर्माणाधीन भवन, स्वीकृत नक्शे और हाईटेंशन लाइन के बीच सुरक्षित दूरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक जिस निर्माणाधीन मकान में दोनों राजमिस्त्री पहुंचे थे, उसके पास से 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों कुछ देर तक नीचे बातचीत करने के बाद भवन की ऊपरी मंजिल की ओर गए थे। इसी दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से हादसा हुआ। करंट का झटका इतना तेज था कि दोनों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद की कोशिश की, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद स्वर्ण जयंती नगर में मातम का माहौल है। हादसे ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि निर्माण कार्य के दौरान हाईटेंशन लाइन के आसपास सुरक्षा मानकों और सुरक्षित दूरी का कितना ध्यान रखा गया था। खास बात यह है कि हादसे से पहले इस निर्माण को लेकर नगर निगम स्तर पर आपत्ति भी सामने आ चुकी थी।
नगर निगम अधिकारी अनुपम तिवारी के मुताबिक इस निर्माण को लेकर कार्यालय में शिकायत मिली थी, जिसके बाद जोन कार्यालय की ओर से अप्रैल, मई और जून के दौरान तीन नोटिस जारी किए गए थे। उनका कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया। अनुमति के विपरीत किए गए निर्माण वाले हिस्से को हटाने की कार्रवाई भी की गई थी। अनुपम तिवारी ने बताया कि जेसीबी से जिस हिस्से तक कार्रवाई संभव थी, उतना हिस्सा हटाया गया है और यदि बाकी हिस्से को संबंधित व्यक्ति द्वारा स्वयं नहीं हटाया गया तो नगर निगम की ओर से मैनुअल कार्रवाई की जाएगी।
वहीं नगर निगम इंजीनियर जुगल किशोर ने बताया कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण को लेकर पहले ही तीन नोटिस दिए जा चुके थे। उनके अनुसार 4 अगस्त को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य बंद कराया गया था और मकान मालिक से लिखित पंचनामा भी लिया गया था, जिसमें सात दिन के भीतर नक्शे के अनुसार निर्माण स्वयं करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की बात सामने आई है।
मामले में सिविल लाइन थाना प्रभारी किशोर केवट ने बताया कि नगर निगम की ओर से भवन के कुछ हिस्सों को हटाने के संबंध में पहले ही नोटिस दिया गया था। इसी कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। टीआई के मुताबिक मकान मालिक और उसके परिवार की ओर से कार्रवाई का विरोध भी किया जा रहा था। बाद में नगर निगम और मकान मालिक के बीच चर्चा के बाद कुछ हिस्से को मौके पर हटाया गया, जबकि बाकी हिस्से को स्वयं हटाने का आश्वासन दिया गया था।
अब इसी निर्माण के दौरान दो राजमिस्त्रियों की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हादसे के बाद यह सवाल भी सामने है कि जब भवन के पास से हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी और निर्माण को लेकर पहले से आपत्तियां थीं, तो वहां काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
दो मजदूरों की मौत के बाद अब निर्माण कार्यों के दौरान बिजली लाइनों से सुरक्षित दूरी और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्वर्ण जयंती नगर सहित शहर के कई इलाकों में मकानों के आसपास से हाईटेंशन लाइनें गुजरती हैं, ऐसे में निर्माण के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इस घटना में भी अब जांच का दायरा केवल हादसे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्माण की स्थिति, स्वीकृत नक्शे, पूर्व में जारी नोटिस, मौके पर किए गए काम और हाईटेंशन लाइन से सुरक्षित दूरी जैसे पहलुओं की पड़ताल भी अहम होगी।
फिलहाल दोनों मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि नियमों का पालन कराने की व्यवस्था और मौके पर वास्तविक सुरक्षा के बीच आखिर इतनी बड़ी खाई क्यों रह गई, जिसकी कीमत दो परिवारों को अपने दो सदस्यों की जान देकर चुकानी पड़ी।
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