कसडोल। CG NEWS: कसडोल विकासखंड के ग्राम पंचायत सुकली निवासी 28 वर्षीय मोतीलाल विश्वकर्मा कुछ समय पहले लापता हो गया था। बताया जा रहा है कि मोतीलाल की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और वह थोड़ा मंदबुद्धि है। उसके अचानक लापता होने के बाद परिजनों ने पुलिस चौकी में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसी बीच आसपास के एक गांव में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना सामने आई। पुलिस ने मोतीलाल के परिजनों को शव की पहचान के लिए बुलाया। परिजनों ने शव को मोतीलाल का ही शव समझ लिया। इसके बाद परिवार उस शव को अपने घर लेकर आया और सामाजिक एवं पारिवारिक रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इतना ही नहीं, परिवार ने मृत समझे गए मोतीलाल का दशगात्र कार्यक्रम भी कर दिया।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे गांव की कहानी ही बदल दी। अंतिम संस्कार के करीब तीन दिन बाद मोतीलाल विश्वकर्मा खुद गांव में वापस आ गया। बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में जब ग्रामीणों ने मोतीलाल को गांव में देखा तो कई लोग डर गए। लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ कि जिसे वे मृत समझ चुके हैं, वह उनके सामने जिंदा खड़ा है।
इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। पुलिस मोतीलाल को अपने साथ लेकर आई। जैसे ही परिवार के लोगों ने मोतीलाल को जिंदा देखा, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिस परिवार ने कुछ दिन पहले उसे मृत मानकर अंतिम विदाई दे दी थी, उसी परिवार के सामने अब मोतीलाल जिंदा खड़ा था। अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिस शव को मोतीलाल का समझकर अंतिम संस्कार किया गया, वह शव किसका था?
शव की वास्तविक पहचान कैसे हुई, परिजनों ने किस आधार पर उसकी पहचान मोतीलाल के रूप में की और जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया वह आखिर कौन था—इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल, सुकली गांव में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि जिसे वे खो चुके समझ रहे थे, मोतीलाल जिंदा उनके बीच वापस लौट आया है।