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Misleading Advertisement: ‘90% सफलता’ का दावा पड़ा भारी, नवजातों के विकास पर भ्रामक विज्ञापन देने वाली कंपनी पर CCPA की बड़ी कार्रवाई

27 Feb 2026 | WEENEWS DESK | 65 views
Misleading Advertisement: ‘90% सफलता’ का दावा पड़ा भारी, नवजातों के विकास पर भ्रामक विज्ञापन देने वाली कंपनी पर CCPA की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली Misleading Advertisement: नई दिल्ली से शिक्षा और अर्ली-लर्निंग सेक्टर को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां केंद्र सरकार के केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नवजात शिशुओं के विकास को लेकर बढ़-चढ़कर दावे करने वाली ‘राइजिंग सुपरस्टार्स’ नामक स्टार्टअप कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की है।

25 फरवरी 2026 को जारी अंतिम आदेश में प्राधिकरण ने कंपनी को अनुचित व्यापार प्रथाओं और बच्चों के विकास से जुड़े अप्रमाणित दावे करने का दोषी पाया और भारी जुर्माना लगाया। जांच में सामने आया कि कंपनी अपने विज्ञापनों में यह दावा कर रही थी कि उसके प्रोग्राम से नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों का IQ तेजी से बढ़ सकता है तथा वे तीन महीने में रेंगने, आठ महीने में चलने और दो साल में दौड़ने लगते हैं।

कंपनी ‘90% सफलता दर’ जैसे आंकड़े भी पेश कर रही थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये आंकड़े किस वैज्ञानिक आधार या स्वतंत्र शोध पर आधारित हैं। CCPA ने पाया कि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं था और विज्ञापनों में ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया जिससे अभिभावकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बने और उन्हें यह डर महसूस हो कि यदि वे यह प्रोग्राम नहीं चुनेंगे तो उनका बच्चा पीछे रह जाएगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत विज्ञापनों में दी गई जानकारी का सत्य और सत्यापन योग्य होना अनिवार्य है, जिसका यहां पालन नहीं किया गया। मुख्य आयुक्त निधि खरे के नेतृत्व में प्राधिकरण ने कंपनी को सभी सोशल मीडिया और प्रिंट प्लेटफॉर्म से भ्रामक दावे तत्काल हटाने और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसे अपुष्ट दावे दोहराए गए तो लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन स्टार्टअप्स के लिए बड़ा संदेश है जो “अर्ली ब्रेन डेवलपमेंट” के नाम पर माता-पिता की भावनाओं का फायदा उठाते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने साफ किया है कि शिक्षा कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है और इसमें “सफलता की गारंटी” जैसे शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। यह कार्रवाई न केवल एक कंपनी तक सीमित है, बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



WEENEWS DESK
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