प्रेस क्लब के हमर पहुना कार्यक्रम में शहर विकास और राजनीति पर बेबाक बातचीत
बिलासपुर। बिलासपुर शहर में जलभराव की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान और निर्बाध बिजली आपूर्ति सबसे बड़ी प्राथमिकता है। राघवेंद्र राव सभा भवन परिसर स्थित बिलासपुर प्रेस क्लब में रविवार को आयोजित हमर पहुना कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए मंत्री पद से ज्यादा जनता का काम महत्वपूर्ण है और अगर जनता दोबारा मौका देती है तो वे शहर के विकास के लिए केंद्र सरकार से अधिक वित्तीय सहायता लाने का पूरा प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक सफर शिक्षा तकनीकी कार्य और शहर की बुनियादी समस्याओं पर लंबी चर्चा की।
मंत्री पद नहीं मिलने से शहर का कद कम नहीं होता
प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के सवाल पर पूर्व विधायक ने कहा कि विधायक के पहले कार्यकाल में सीखने और समझने का मौका मिलता है। मंत्रिमंडल बनाना और अपनी टीम चुनना मुख्यमंत्री का अधिकार होता है। किसी एक नेता के मंत्री बनने या नहीं बनने से बिलासपुर का राजनीतिक महत्व बिल्कुल कम नहीं होता। बिलासपुर प्रदेश का एक अहम शहर है और इसकी पहचान किसी पद से नहीं बल्कि विकास कार्यों से तय होती है। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा जनहित और काम मायने रखता है।
एयरपोर्ट विस्तार और बी ग्रेड सिटी के दर्जे पर जोर
शहर के विकास पर बात करते हुए शैलेष पांडेय ने बताया कि बिलासपुर एयरपोर्ट की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए उन्होंने विधानसभा में प्रमुखता से आवाज उठाई थी। एयरपोर्ट की थ्री सी श्रेणी नाइट लैंडिंग सुविधा और इसका नाम बिलासा देवी केंवटीन एयरपोर्ट रखने के लिए विधानसभा में सर्वसम्मति से संकल्प पारित कराया गया था। इसके साथ ही शहर को बी ग्रेड सिटी का दर्जा दिलाने के लिए नगर निगम सीमा विस्तार का मुद्दा भी उन्होंने चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री और कलेक्टर के सामने उठाया था।
अरपा नदी शहर की पहचान और जल निकासी की योजना
अरपा नदी को बिलासपुर की भावनात्मक और पर्यावरणीय पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि शिवघाट और अन्य प्रस्तावित बैराजों का मुख्य उद्देश्य नदी में साल भर पानी बनाए रखना है। बारिश के समय होने वाले जलभराव से शहर को बचाने के लिए जल निकासी और शहरी आधारभूत ढांचे पर एक साथ काम करना जरूरी है। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि गरीब बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने के लिए उन्होंने विधायक रहते हुए तिलक नगर और दयालबंद क्षेत्र में स्कूल शुरू करवाए ताकि आर्थिक तंगी अच्छी शिक्षा में बाधा न बने।
10 किलोवाट सोलर सिस्टम के बाद भी 10 हजार का बिल
बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूर्व विधायक ने अपनी ही परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि उनके घर में 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा हुआ है लेकिन इसके बावजूद हर महीने 9 से 10 हजार रुपये का बिजली बिल आ रहा है। उन्होंने सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली की खरीद दर और उपभोक्ताओं को दी जाने वाली बिजली दर के बीच भारी अंतर पर सवाल उठाए।
कोरोना काल में भीड़ जुटने पर दर्ज हुई थी एफआईआर
कोरोना महामारी के दौर को जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा बताते हुए उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में मजदूर ऑटो चालक और हमाल राशन के लिए उनके घर आते थे। सुबह से देर रात तक मदद करने के दौरान वे खुद भी संक्रमित हो गए थे। उस समय घर पर मदद मांगने वालों की भीड़ जुटने के कारण उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी।
बेटी के टिफिन के लिए सीखा खाना बनाना
कार्यक्रम में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। वर्ष 1997 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले पांडेय ने बताया कि दूसरी बेटी के जन्म के समय पत्नी की तबीयत खराब थी तब बड़ी बेटी को सुबह स्कूल भेजने और टिफिन बनाने की जिम्मेदारी उन पर आ गई। सुबह जल्दी कोई मदद नहीं मिलने पर उन्होंने खुद खाना बनाना सीखा। आज भी वे आलू पालक भरवां बैंगन और खीर जैसे व्यंजन शौक से बनाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा और अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने पूर्व विधायक से शहर की वर्तमान स्थिति पर सवाल किए। पूर्व विधायक ने आश्वसन दिया कि वे शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर आगे भी अपनी सक्रियता बनाए रखेंगे। आने वाले दिनों में बी ग्रेड सिटी के दर्जे को लेकर वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी
ताकि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।