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धर्म नहीं बचेगा: अंग्रेजों ने साजिश रचकर तबाह किए थे 32 हजार गुरुकुल, अब छत्तीसगढ़ में संस्कृत बचाने सरकार से उठी पैसों की मांग

03 Oct 2026 | WEENEWS DESK | 974 views
धर्म नहीं बचेगा: अंग्रेजों ने साजिश रचकर तबाह किए थे 32 हजार गुरुकुल, अब छत्तीसगढ़ में संस्कृत बचाने सरकार से उठी पैसों की मांग

बिलासपुर। जो काम विदेशी हमलावर अपनी तलवारों से नहीं कर पाए, उसे अंग्रेजों ने अपने कानूनों से कर दिखाया। एक सोची-समझी रणनीति के तहत देश के करीब 32 हजार गुरुकुलों को बर्बाद कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि हमारी पारंपरिक शिक्षा और संस्कृत भाषा हाशिए पर चली गई। अगर संस्कृत खत्म हुई तो हमारा धर्म भी नहीं बचेगा। यह बात पाठिनी सेवा शोध संस्थान की संरक्षक पुष्पा दीक्षित ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।

दीक्षित ने बताया कि पुराने समय में हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था मंदिरों और गुरुकुलों से ही चलती थी। मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं थे, बल्कि ज्ञान बांटने के बड़े केंद्र हुआ करते थे। अंग्रेजी राज में जानबूझकर ऐसी शिक्षा नीतियां लाई गईं जिससे पश्चिमी पढ़ाई को तो तवज्जो मिली, लेकिन संस्कृत और हमारी अपनी ज्ञान परंपरा को कमजोर कर दिया गया। वेद, आयुर्वेद, गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों का पूरा खजाना संस्कृत में भरा पड़ा है, लेकिन इसे फैलाने के लिए जैसी मेहनत होनी चाहिए थी, वैसी हुई नहीं।

आज वक्त की मांग है कि गुरुकुल व्यवस्था को फिर से खड़ा किया जाए। इसके लिए सिर्फ नई इमारतें बनाना काफी नहीं होगा। पढ़ने वाले बच्चों के लिए रहने, खाने और पढ़ाई की बुनियादी सुविधाएं देनी होंगी। पढ़ाने वाले शिक्षकों को अच्छा वेतन देना और संस्थानों की नियमित जांच के लिए अफसरों की ड्यूटी लगाना जरूरी है, ताकि पढ़ाई का स्तर गिरे नहीं। सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं जो विद्यालय चला रही हैं, उन्हें भी संसाधन दिए जाने चाहिए।


छत्तीसगढ़ में संस्कृत के लिए रखे गए 10 प्रमुख मुद्दे:


राज्य में संस्कृत पढ़ने वालों की गिनती बढ़ रही है। इसे और मजबूत करने और संस्कृत को आम जनमानस की बोलचाल की भाषा बनाने के लिए कुछ प्रमुख मांगे सामने रखी गई हैं:

  • बिना सरकारी अनुदान वाले संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों को सम्मानजनक आर्थिक मदद दी जाए।
  • संस्कृत पाठशालाओं को उनके माहौल के हिसाब से गुरुकुल बनाने के लिए पैसा दिया जाए।
  • कॉलेजों में संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो। पहली कक्षा से इसे अनिवार्य किया जाए और पूर्व माध्यमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षकों की अलग से भर्ती हो।
  • व्यावसायिक शिक्षा को संस्कृत के विकल्प के तौर पर न रखा जाए।
  • छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामंडल का अनुदान बजट बढ़ाया जाए और बच्चों को इसी मंडल के जरिए आर्थिक मदद मिले।
  • संस्कृत को आसान बनाकर बातचीत की भाषा बनाने के लिए सम्भाषण प्रशिक्षण को बढ़ावा मिले।
  • आने वाली जनगणना में लोगों को यह लिखवाने के लिए प्रेरित किया जाए कि 'मैं संस्कृत जानता हूं'।
  • राज्य के विद्यालयों में तैनात संस्कृत अध्यापकों को लगातार ट्रेनिंग दी जाए।
  • संस्कृत के प्रचार के लिए राज्य के जानकारों और विद्वानों से समय-समय पर मार्गदर्शन लिया जाए।
  • सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रमों में संस्कृत भाषा को जगह मिले।

कुल मिलाकर मांग यही है कि छत्तीसगढ़ में संस्कृत को उसका पुराना और सम्मानपूर्ण स्थान वापस दिलाने के लिए सरकार पर्याप्त आर्थिक मदद दे। स्कूल-कॉलेजों में आधुनिक और तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कृत का तालमेल बिठाना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी अपनी पुरानी जड़ों से कटने न पाए।

WEENEWS DESK
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