CG | Wed, 21 October 2026

No Ad Available

Sangh Shatabdi : विजयादशमी उत्सव पर मोहन भागवत के संबोधन की 10 बड़ी बातें ,पीएम ने की संबोधन तारीफ

20 Oct 2026 | WEENEWS DESK | 959 views
Sangh Shatabdi : विजयादशमी उत्सव पर मोहन भागवत के संबोधन की 10 बड़ी बातें ,पीएम ने की संबोधन तारीफ

नागपुर। Sangh Shatabdi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने पश्चिमी प्रभाव, नई पीढ़ी की चुनौतियों, नशे की समस्या, ओटीटी प्लेटफॉर्म, पर्यावरण और देश की सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर विचार रखे। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार के कार्य की सराहना करते हुए संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर भी जोर दिया।

मोहन भागवत के संबोधन की 10 प्रमुख बातें

1. पश्चिमी प्रभाव को लेकर आगाह

डॉ. भागवत ने कहा कि पश्चिम से उठने वाले कुछ प्रभावों और आंदोलनों को समझने की जरूरत है। उन्होंने फ्रांस और अल्बानिया का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं। उनके अनुसार, केवल सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से होने वाले आंदोलन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करते और समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं।

2. पंच परिवर्तन को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील

भागवत ने पंच परिवर्तन की पांच पहलों—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व बोध एवं स्वदेशी और नागरिक अनुशासन—का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये केवल किसी वर्ष का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन और व्यवहार में बदलाव लाने का माध्यम हैं।

3. नई पीढ़ी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर चिंता

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को उचित-अनुचित का विवेक किए बिना ग्रहण कर सकती है। ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर भी समाज में अनुशासन और नियमन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस विषय पर शासन-प्रशासन को विचार करना चाहिए।

4. नशे की समस्या से निपटने पर जोर

आरएसएस प्रमुख ने युवाओं में नशीले पदार्थों की बढ़ती आदत को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज को समय रहते प्रयास करने चाहिए। परिवार और अभिभावकों की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण है।

5. विकास में विज्ञान और तकनीक के साथ संतुलन जरूरी

भागवत ने कहा कि विज्ञान और तकनीक जीवन को सुविधाजनक बनाने के साथ ज्ञान और तर्क के आधार पर व्यवहार सुधारने में मदद करते हैं। हालांकि, तकनीक को केवल साधन के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि सिर्फ उपभोगवादी सोच पर आधारित विकास से सुविधाओं के साथ बड़े नुकसान भी हो सकते हैं।

6. हिमालय क्षेत्र के विकास का दिया उदाहरण

उन्होंने नेपाल में आई त्रासदी का उल्लेख करते हुए हिमालय क्षेत्र में विकास के तरीके पर विचार करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, भारत, तिब्बत, भूटान और चीन तक फैले हिमालय क्षेत्र में विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि जरूरी है, ताकि पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को समझा जा सके।

7. समाज में धैर्य और जिम्मेदारी बनाए रखने की अपील

सरसंघचालक ने कहा कि बेहतर सामाजिक वातावरण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को धैर्य और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। नागरिकों को सोच-समझकर निर्णय लेने और अपने रोजमर्रा के व्यवहार में दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने की जरूरत है।

8. कैप्टन स्मित मच्छार के कार्य की सराहना

भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार के हालिया कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कारों से प्रेरित होकर उन्होंने जो किया, वह स्वाभाविक था। उन्होंने कहा कि ऐसी परीक्षा की घड़ी में व्यक्ति के भीतर के संस्कार और परंपराएं ही सामने आती हैं।

9. राज नारायण बसु और स्वदेशी चेतना का जिक्र

उन्होंने बंगाल के राज नारायण बसु के योगदान को याद करते हुए स्वदेशी मेलों और आत्मबोध के महत्व पर बात की। भागवत ने कहा कि देश को अपनी सांस्कृतिक पहचान को समझने और स्वीकार करने के साथ जीवन के सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता और आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है।

10. स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और राष्ट्रीय एकता पर जोर

भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके संघर्ष से बनी शक्ति ने ब्रिटिश शासन को भारत छोड़ने के लिए मजबूर करने में भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय समाज की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आंतरिक एकता को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और संतुलित विकास पर रहा जोर

मोहन भागवत के संबोधन में नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों से लेकर पर्यावरण, तकनीक, स्वदेशी और राष्ट्रीय एकता तक कई मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने समाज और शासन-प्रशासन से मिलकर काम करने की जरूरत बताई। उनके संदेश का मुख्य जोर संस्कारों, नागरिक अनुशासन और संतुलित विकास के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने पर रहा।

प्रधानमंत्री ने की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की तारीफ की है । नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी । पीएम मोदी ने उनके संबोधन को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

पीएम मोदी ने खास तौर पर समाज में सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये मूल्य RSS के हर स्वयंसेवक के काम का अहम हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने पंच परिवर्तन पर मोहन भागवत के विचारों का भी जिक्र किया और कहा कि इनके जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिल सकती है।

 


WEENEWS DESK
WEENEWS DESK

Join WhatsApp


❌ No active feeds found.